hay re insan ki mazbooriyan lyrics
Rizwan Ahmed (Saif)
फिल्म घूंघट 1980
गायक : मोहम्मद रफ़ी
संगीत : मोइहंमद रफ़ी / रवि
हाय रे इंसान की मज़बूरिया
हाय रे इंसान की मज़बूरिया
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियां दूरियां
हाय रे इंसान की मज़बूरिया
कुछ अँधेरे में नज़र आता नहीं
कोई तारा राह दिखलाता नहीं
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ
हाय रे इंसान की मज़बूरिया
शम्मा के अंजाम की किस को खबर
कझटं होगी या जलेगी रात भर
शम्मा के अंजाम की किस को खबर
कझटं होगी या जलेगी रात भर
जाने ये शोला बनेगा या धुंआ
जाने ये शोला बनेगा या धुंआ
हाय रे इंसान की मज़बूरिया
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियां दूरियां
हाय रे इंसान की मज़बूरिया

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