apne hi parivar ko maut ki neend sula kar khooni farar

दिल्ली के करावल नगर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और दो नाबालिग बेटियों की हत्या कर दी।

यह घटना शुक्रवार (रक्षाबंधन के दिन) की बताई जा रही है। आरोपी का नाम प्रदीप बताया जा रहा है, जिसने अपनी पत्नी जयश्री और 5 व 7 साल की दो बेटियों की हत्या कर दी। हत्या के बाद से आरोपी फरार है।
पुलिस की शुरुआती जाँच में घरेलू विवाद को हत्या का कारण बताया जा रहा है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

Mohammad Siraj

"जब पहली बार सिराज के खाते में करोड़ों की IPL सैलरी आई — तो मां ने कहा: 'बेटा नए घर का सपना पूरा कर लो।’ लेकिन अब्बा की एक बात दिल में लग गई…

उन्होंने कहा:

‘बेटा, जो तू खा रहा है, वो मोहल्ले में 45 लोग नहीं खा पा रहे हैं… अल्लाह ने तुझ पर रहमत की है, तुझे ज़रूरतमंदों की ज़िम्मेदारी उठानी होगी।’

सिराज ने ना घर लिया, ना गाड़ी…
पहली कमाई से 45 गरीब परिवारों में राशन बंटवाया।
आज भी हर ईद पर चुपचाप उनके घर में सेवइयां भिजवाता है —
कभी तस्वीर नहीं डाली, कभी शोहरत नहीं चाही।
बस अब्बा की बात निभा रहा है…"

2 line shayari

Rizwan Ahmed 

देखने से अब___दिल नहीं भरता 
दिल अब तुझको छूना चाहता है!
Dekhne se ab dil nahi bharta
Dil tujhko chhuna chahta Hai


घंटो सामने बैठा कर देखना है तुझे 
यह लिपटना चूमना तो आम बातें हैं!
Ghanto samne baitha kar dekhna Hai tujhe 
Ye lipatna chumna to aam baten Hain!!


चाहे वो__तकलीफ कितनी भी दे 
पर सुकून उसी के पास मिलता है!
Chahe wo taklif kitni bhi De 
per sukun usi ke pass milta Hai!



शाह ए मन देखने से दिल नहीं भरता तुझको छूना है______बात करनी है!!
Shah e man dekhne se dil nahi bharta
Tujhko choona hai baat karni hai!!


मुझे फिर से पुकारो______मेरा नाम लेकर 
मुझे महसूस करना है खुद को तुम्हारे होठों पर!!
Mujhe fir se pukaro mera naam lekar 
mujhe mahsus karna hai khud Ko tumhare hothon per!


बड़े ही होश में रहते थे हम 
फिर हमें एक दिन तेरे बदन की खुशबू ने बदहवास किया!!
Bade hi hosh mein rahte the ham 
FIR hamen ek din Tere badan ki khushbu ne badhavas kiya!


तेरी खुशबू कहीं भी नहीं मिली
 फूल सारे खरीद__कर देखे हैं!!
Khushbu kahin bhi nahin Mili phool sare khareed kar dekhen Hain!!



तुम्हारे दिल में कैद है हमारी धड़कनें
धड़कते रहना वरना मर जाएंगे हम!!
Tumhare dil mei qaid hain hamari dhadkane
Dhadakte rahna warna mar jayenge hum!!



बहुत शिद्दत_______से दिल चाहता है 
के बंद आंखें खोलूं और सामने तुम हो!
Bahut shiddat Se Dil chahta Hai Ki band Aankhen kholun aur samne Tum Ho



अपने नजदीकियों से दूर मत करना मुझे 
कि मेरे पास जीने की वजह बहुत कम है!
Apni nazdikiyon Se dur mat Karna mujhe 
ki mere pass jeene Ki vajah bahut kam hai!



वो इतनी दूर रहने वाला शख्स 
टकराया भी तो सीधा दिल से!
Wo Itni dur Rahane wala shakhs takraya bhi to_____sidha Dil Se!!



मैं सोचूं तो मेरा ख्याल हो तुम
 मैं मांगू तो मेरी दुआ हो तुम!!
Main sochun to Mera khyal Ho Tum 
main mangu to Meri Dua Ho Tum!



आओ एक दूसरे का हाथ हमने उम्र भर के लिए 
फिर खुशी मिले या____गम हमारा नसीब!
Aao ek dusre ka hath thamne umra Bhar ke liye 
FIR Khushi mile ya Gam hamara Naseeb!!



नहीं चाहिए मुझे तुमसे कोई बेहतर 
मुझे तुम्हारा साथ ही हसीन लगता है!
Nahin chahie mujhe tumse Koi behtar 
mujhe tumhara Sath hi hasin lagta hai!



आपको समझ____क्यों नहीं आता 
मेरा दिल नहीं लगता आपके बिना!
Aapko samajh kyon nahin aata Mera Dil nahin lagta aapke bina!


चाहे मुझे जिंदगी___भर सताना 
लेकिन मुझे छोड़ कर मत जाना!
Chahe mujhe zindgi Bhar Satana 
lekin mujhe chhod Kar mat Jana!


pyari baten golden words

Rizwan Ahmed 


जिस शख्स की गलती भी गलती ना लगे किताब ए इश्क में उसी को महबूब कहते हैं!!
Jis shakhs ki galti bhi galti Na Lage 
kitaben Ishq mein usi ko mahbub kahate Hain!!



गलतफहमी इतनी थी कि मैंने कहा रुको,... मत जाओ 
उसने समझा रुको मत,...जाओ!
Galatfahmi itni thi ki maine kaha ruko,....mat jao 
usne samjha ruko mat,...... jao!


सबर रख तुझे रुलाने वाले भी रोएंगे एक दिन!
Sabar Rakh tujhe rulane Wale bhi royenge ek din!


सबर की एक बात बहुत अच्छी है जब आ जाता है तो किसी की तलब नहीं रहती! 
Sabar ki ek baat bahut acchi hai jab a jata Hai to Kisi Ki talab nahin rahti!

सख्त हाथों से भी छूट जाती है उंगलियां रिश्ते ताकत से नहीं मोहब्बत से थामे जाते हैं!
Sakht hathon se bhi chhut jaati Hai ungaliyan
Rishte takat se nahin Mohabbat se thaame jaate Hain!


मेरी आवाज चुभने लगी थी उसे मैंने तोहफे में खामोशी दे दी!
Meri awaaz sunane lagi Thi use Maine tohfe mein khamoshi de di!


दिल के अच्छे लोगों को दुनिया बेवकूफ समझती है!
il ke acche logon Ko duniya bevkuf samajhti Hai!




कुछ तारीखें कुछ दिन कुछ लम्हे हमेशा याद रहते हैं!!
Kuchh tareekhen kuchh din kuchh Lamhe hamesha yad rahte hain!!


Ye bhi dekhen👇👇

2 line shayari

Rizwan Ahmed 

तुम इजहार ए मोहब्बत तो बहुत करते हो
कभी अपने हाथ में लिखा है नाम मेरा!!
Tum izhaar a Mohabbat to bahut karte ho 
kabhi Apne hath per likha hai Naam Mera?



ये जो__अहम होते हैं 
ये बड़े बेरहम होते हैं !!
Ye Jo aham______hote hain 
ye bade berham hote Hain!!

टूट कर_______चाहने वाले 
अक्सर टूट कर रह जाते हैं!!
Tut kar________chahane wale 
Aksar Tut kar rah jaate Hain!!



मुझे था इश्क_____तेरी रूह से और अब भी है
जिस्म से कोई सरोकार हो यह जरूरी तो नहीं!!
Mujhe tha Ishq Teri ruh se aur ab bhi Hai 
Jism Se Koi sarokar ho yah jaruri to nahin!



क्या कसूर_______है मेरा 
सिर्फ यही कि मुख्लीस हूं!!
Kya Kasur______Hai Mera 
sirf yahi ke mukhlis hun!!






tera sath hai kitna pyara

 Rizwan Ahmed Saif 


गीत: तेरा साथ है कितना प्यारा 

फिल्म: जांबाज़ 1986 

गायक गायिका : किशोर कुमार सपना मुखर्जी 

गीतकार: इन्दीवर 

संगीतकार: कल्याण जी आनंदजी 



तेरा साथ है कितना प्यारा 
तेरा साथ है कितना प्यारा 
कम लगता है जीवन सारा 
तेरे मिलन की लगन में 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 


मैंने... मैंने तन मन तुझ पे वारा 
प्यास बुझे ना करके नज़ारा 
तेरे मिलन की लगन में 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 
हो तेरा साथ है कितना प्यारा... 


जितनी तुझमे है अदा उतनी है वफ़ा 
उतनी है वफ़ा 
जितना जहाँ में प्यार है तुझसे मुझे  मिला  
तुझसे मुझे मिला 
बढ़ती जाए ये बेताबी 
बढ़ती जाये ये बेताबी जितना करूँ नज़ारा 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 
हो तेरा साथ है कितना प्यारा... 


प्यार के एक एक पल पे है... 
सौ जीवन क़ुर्बान सौ जीवन क़ुर्बान 
प्यार कभी मरता नहीं.. 
मरते हैं इंसान मरते हैं इंसान 
नाम उसी का जीवन है जो 
नाम उसी का जीवन है जो तेरे साथ गुज़ारा 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 
हमें आना पड़ेगा दुनिया में दोबारा 





hay re insan ki mazbooriyan lyrics



Rizwan Ahmed (Saif)  


फिल्म घूंघट 1980 

गायक : मोहम्मद रफ़ी 

संगीत : मोइहंमद रफ़ी / रवि 



हाय रे इंसान की मज़बूरिया 

हाय रे इंसान की मज़बूरिया 

पास रह कर भी हैं कितनी दूरियां दूरियां 

हाय रे इंसान की मज़बूरिया 


कुछ अँधेरे में नज़र आता नहीं 

कोई तारा राह दिखलाता नहीं 

जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ 

जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ 

हाय रे इंसान की मज़बूरिया 


शम्मा के अंजाम की किस को खबर 

कझटं होगी या जलेगी रात भर 

शम्मा के अंजाम की किस को खबर 

कझटं होगी या जलेगी रात भर 

जाने ये शोला बनेगा या धुंआ 

जाने ये शोला बनेगा या धुंआ 

हाय रे इंसान की मज़बूरिया 

पास रह कर भी हैं कितनी दूरियां दूरियां 

हाय रे इंसान की मज़बूरिया 




 

Babar ki beti ki kahani

 बाबर की बेटी की कहानी जिसने ठुकराए थे ऑटोमन सुल्तान के शाही फरमान :बीबीसी न्यूज़


ये कहानी सन 1576 की है जब हिंदुस्तान की सरज़मीं पर मुग़लिया सल्तनत का परचम लहरा रहा था और अरब दुनिया पर ऑटोमन साम्राज्य का राज था.


#हिंदुस्तान में अकबर शहंशाह थे तो ऑटोमन साम्राज्य का ताज़ सुल्तान मुराद अली के सिर पर था.


इसी दौर में मुग़लिया सल्तनत की एक राजकुमारी ने मक्का-मदीना की अभूतपूर्व यात्रा की.


मुग़लकालीन भारत में ये पहला मौका था जब कोई महिला पवित्र हज यात्रा पर गयी. हज को इस्लाम के पांच आधार स्तंभों में से एक माना जाता है.


ये मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर की बेटी गुलबदन बेगम की कहानी है जिन्होंने 53 साल की उम्र में फतेहपुर सीकरी की आरामदायक दुनिया छोड़कर एक ऐसी यात्रा पर जाने का फ़ैसला किया जो अगले छह सालों तक जारी रही.


गुलबदन बेगम इस यात्रा पर अकेले ही नहीं गईं बल्कि उन्होंने अपने साथ जाने वाली शाही महिलाओं के एक छोटे से समूह का नेतृत्व भी किया.


लेकिन अपने आप में शानदार रही इस यात्रा से जुड़े ब्योरे रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं.


इतिहासकार मानते हैं कि शायद इसकी एक वजह ये रही हो कि दरबार के पुरुष इतिहासकारों ने महिला यात्रियों के ‘मान-सम्मान’ के नाम पर उनकी यात्रा से जुड़े तथ्यों को ज़ाहिर नहीं किया.


शानदार यात्रा की अधूरी दास्तां


इतिहासकार और लेखक रूबी लाल ने अपनी किताब 'वेगाबॉन्ड प्रिंसेज़: द ग्रेट एडवेंचर्स ऑफ़ गुलबदन' में इस यात्रा का ज़िक्र किया है.


रूबी लाल लिखती हैं कि गुलबदन बेगम की इस यात्रा में बहादुरी के साथ-साथ करुणा और विद्रोह से जुड़ी घटनाएं भी शामिल हैं.


गुलबदन बेगम को मुगल साम्राज्य की पहली और इकलौती महिला इतिहासकार माना जाता है.


उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को अपनी किताब हुमायूं नामा में संकलित किया है. लेकिन उनकी ये किताब भी अधूरी है. इस किताब के कई पन्ने आज तक गायब हैं.


रूबी लाल ने इस किताब को लिखने के लिए शोध करते हुए ऑटोमन साम्राज्य के इतिहास से लेकर फारसी और मुगल पांडुलिपियों समेत तमाम दूसरे दस्तावेज़ों को खंगाला है.


वह कहती हैं, "गुलबदन एक ऐसे दौर में लिख रही थीं जब तत्कालीन इतिहासकारों की ओर से शाही हस्तियों की ओर से लिखी गयी रचनाओं की प्रतियां बनाना आम बात थी. लेकिन गुलबदन की किताब की एक भी पूर्ण प्रति उपलब्ध नहीं है."


"इतनी ताक़तवर महिला की अपनी तरह की इस इकलौती सी यात्रा पर चुप्पी बहुत कुछ कहती है."


सत्ता के केंद्र से दूरी


सन 1523 में काबुल में जन्म लेने वाली गुलबदन की माँ दिलदार बेगम थीं. वह बाबर की तीसरी पत्नी थीं.


गुलबदन के जन्म के वक़्त बाबर घर से दूर रहते हुए हिंदुस्तान पर चढ़ाई करने के मंसूबे बना रहे थे.


जब ये जंगें शुरू हुईं तो बाबर का घर आना कम हो गया. गुलबदन जल्द ही इसकी अभ्यस्त भी हो गयीं.


लेकिन घर के सबसे ताक़तवर शख़्स के साथ कभी-कभार मिलने का ये सिलसिला आगे भी जारी रहा.


पिता बाबर के बाद सौतेले भाई हुमायूं और भतीजे अकबर के साथ भी उनके मिलने-जुलने का सिलसिला ऐसा ही रहा.


लेकिन जब शाही ख़ानदान के पुरुष साम्राज्यों को विस्तार देने के लिए जंगें लड़ रहे थे तब गुलबदन मजबूत महिलाओं के साये में बड़ी हो रही थीं. ये महिलाएं बाबर की माँ, चाची, बहनें, बेगम और उनकी बेटियां थीं.


इन महिलाओं की दरबारी गतिविधियों में अहम भूमिका थी. वे राजाओं और राजकुमारों के विश्वासपात्रों और सलाहकारों की भूमिका निभाती थीं.


गुलबदन के बचपन में भी यात्राओं की एक ख़ास जगह थी. बाबर के आगरा तक साम्राज्य फैलाने के बाद वह छह साल की उम्र में काबुल से आगरा तक की यात्रा करने वाली पहली मुगल महिला बनीं.


इसके बाद वह एक विवाहित महिला के रूप में काबुल वापस आईं जब अफ़ग़ान राजा शेरशाह सूरी ने उनके परिवार को हिंदुस्तान से बाहर निकाल दिया.


ये यात्राएं महीनों तक जारी रहा करती थीं. गुलबदन बेगम शाही परिवार की दूसरी महिलाओं के साथ पहाड़ी रास्तों से गुज़रते हुए जोख़िम भरी यात्राएं किया करती थीं.


इन यात्राओं के दौरान वह दुश्मनों के साथ-साथ तमाम दूसरी मुश्किलों का भी सामना करती थीं.


रूबी लाल कहती हैं, "मुग़लिया महिलाएं खानाबदोश जीवनशैली की अभ्यस्त थीं. वे युद्ध लड़ रहे अपने पतियों के साथ लगातार नयी जगहों पर पलायन करने और अस्थाई शिविरों में रहने की अभ्यस्त थीं."


रूबी लाल कहती हैं कि शायद यात्रा करने की इसी आदत की वजह से उन्होंने अपने भतीजे अकबर से हज यात्रा पर जाने की इजाज़त मांगी.


जब अकबर से की बात

अकबर का सबसे बड़ा सपना मुग़लिया सल्तनत का परचम फहराना था. वह जैसे-जैसे हिन्दुस्तान में आगे बढ़ रहे थे, वैसे-वैसे खुद को एक पवित्र शख़्स के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहे थे.


वो पहला ऐसा मुग़ल बादशाह बना जिसने मुग़ल महिलाओं को बिल्कुल अलग-थलग कर हरम की चारदीवारी के अंदर रखने का फ़ैसला किया.


रूबी लिखती हैं, "शाही हरम में बादशाह के अलावा किसी को भी जाने की इजाज़त नहीं थी. इस हरम में सुंदर और कुंवारी लड़कियां रहती थीं. यह एक तरह से इस बात का सबूत था कि मुग़ल बादशाह की स्थिति लगभग दैवीय है."


लेकिन ज़िंदगी में आए इस ठहराव ने गुलबदन को परेशान कर दिया.


साल 1576 के अक्टूबर महीने में उन्होंने अकबर से कहा कि वह हज करने जाना चाहती थीं क्योंकि उन्होंने इसके लिए मन्नत मांगी थी.


अकबर ने इस यात्रा के लिए दो आलीशान मुग़ल जहाजों सलीमी और इलाही को इस्तेमाल करने की इजाज़त दी.


इस महिला दल के साथ सोने – चांदी से भरे बक्से गए जिन्हें खैरात के रूप में बांटा जाना था. इसके साथ ही हज़ारों रुपये कीमत की नकदी और बारह हज़ार सम्मान की पोशाकें भी गयीं.


रूबी लाल ने अपनी किताब में लिखा है, "जब लाल पत्थर वाली मुगलिया राजधानी फतेहपुर सीकरी की गलियों से इन महिलाओं का काफ़िला गुज़र रहा था तो इन्हें देखने के लिए सड़कों पर आम महिलाओं और पुरुषों की भीड़ मौजूद थी."


लेकिन इस यात्रा की शुरुआत ही ख़तरों से हुई. मक्का जाने वाला समुद्री रास्ता पुर्तगालियों के नियंत्रण में था जो मुसलमान जहाजों को लूटने और जलाने के लिए कुख्यात थे.


ईरान से होकर जाने वाला ज़मीनी रास्ता भी इतना ही जोख़िमभरा था क्योंकि इस रूट पर चरमपंथी गुट हुआ करते थे जो यात्रियों पर हमला कर देते थे.


इसी वजह से गुलबदन और उनके साथ गई महिलाएं लगभग एक साल तक सूरत में फंसी रहीं ताकि वे अपनी यात्रा के दौरान पुर्तगालियां से बच सकें.


इसके बाद वे अगले चार दिनों तक गर्म रेगिस्तान पर ऊंट की सवारी करके मक्का पहुंचीं.


जब सुल्तान मुराद के ख़िलाफ़ विद्रोह


उनकी इस यात्रा का सबसे दिलचस्प पहलू मक्का पहुंचने के बाद आया क्योंकि उन्होंने अपने साथ गयीं महिलाओं ने अगले चार सालों तक अरब दुनिया में रहने का फ़ैसला किया.


रूबी लाल लिखती हैं, "जिस तरह वे हरम छोड़ने पर एकमत थीं. उसी तरह वे रेगिस्तानी दुनिया में खानाबदोश जीवन जीते हुए आध्यात्मिकता की तलाश करने पर एकमत थीं."


गुलबदन और उनकी साथी महिलाओं ने जब दान देना शुरू किया तो उनकी हर जगह चर्चा होने लगी.


मुग़लिया सल्तनत की राजकुमारी गुलबदन बेगम की ओर से किए जा रहे दयालुता से भरे इन कार्यों ने ऑटोमन सुल्तान मुराद को नाराज़ कर दिया. क्योंकि उसने इसे अकबर की बढ़ती राजनीतिक शक्ति के रूप में देखा.


ऐसे में सुल्तान ने अपने लोगों को चार शाही फरमान भेजकर गुलबदन और उनके साथ गयीं मुग़लिया महिलाओं को अरब दुनिया से बेदखल करने को कहा.


लेकिन गुलबदन ने हर बार ये फरमान मानने से इनकार कर दिया.


रूबी लाल लिखती हैं, "एक मुग़ल महिला की ओर से विद्रोह की ये अभूतपूर्व घटना थी. यह बताती है कि वह अपनी आज़ादी को लेकर कितनी समर्पित थीं."


इसके बाद सुल्तान ने उनकी ज़िद से आजिज आकर इन महिलाओं के ख़िलाफ़ तुर्की भाषा में एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया जिससे अकबर नाराज़ हो गया.


इस पांचवें फरमान के बाद 1580 में गुलबदन और उनकी साथी महिलाएं अरब से निकलकर दो साल लंबी यात्रा के बाद 1582 में फतेहपुर सीकरी पहुंचीं.


उनकी वापसी के बाद भी उन्हें एक नवाब के रूप में देखा गया. यही नहीं, अकबर ने उन्हें अकबरनामा में योगदान देने को भी कहा.



अकबरनामा में गुलबदन बेगम की इस यात्रा का विस्तार से ज़िक्र है. लेकिन अरब दुनिया में उनके बिताए वक़्त और सुल्तान मुराद की ओर से बाहर निकालने से जुड़ी घटनाओं का ज़िक्र नहीं है. यही नहीं, ये ज़िक्र कहीं और भी उपलब्ध नहीं है.

humne mana babu ji

 





Rizwan Ahmed 12-Oct-2020


  • हमने माना बाबूजी आप ने फकीरी देखी है 
  • तो किया अब पूरे देश से भीख मंगवायेंगे, 

  • हमने माना साहब आप ने बहुत गरीबी देखी है 
  • तो किया अब आप पूरे देश को गरीब ही बनाएंगे,

  • हमने माना बाबू जी आपने चाय बेची है
  • तो किया पूरे देश से चाय बिक़वाएँगे

  • हमने माना बाबूजी आपको पकोड़ो का कारोबार पसंद है
  • तो किया अब पूरे देश से पकोड़े बिक़वाएँगे

  • नाली से गैस निकली और चाय के ठेले तक पहुंची 
  • तो किया अब पूरे देश से चाय का ठेला लगवायेंगे, 

  • बैठ बाहर ज़ी स्टूडियो के बिक गए पकोड़े खूब 
  • तो किया अब पूरे देश से पकोड़े ही बिकवायेंगे,

  • आपने बचपन में मगरमछ के भी कान अमेठ दिए 
  • बताओ साहब हम कैसे उसके कान अमेठ पाएंगे 

  • एक सौ तीस में से छै सौ करोड़ का वोट आपने ले लिया 
  • बोलो साहब हज़ार करोड़ वोटर हम कहाँ से लाएंगे 

  • 350 का सिलंडर महंगा 1000 का सस्ता आपकी द्रष्टि में  
  • 2 हज़ार वाला सिलंडर बोलो साहब हम कैसे ले पाएंगे 

  • पेट्रोल का भी वही हाल खरीदने वाला है बस बेहाल 
  • पेट्रोल के पैसे नहीं बोलो साहब कैसे गाड़ी हम चलाएंगे, 
Please support me



golden words in urdu hindi and english

 Rizwan Ahmed Saif


جانتے ہو پاق موحبّت کیسے کہتے ہیں ؟

جب آپ آپس مے ایک دوسرے کے لئے دعا کرتے

 ہو اسے پاق موہببت کہتے ہیں 

जानते हो पाक मोहब्बत किसे कहते हैं ?

जब आप एक दुसरे के लिए दुआ करते हो 

उसे पाक मोहब्बत कहते हैं 

Do you know what is called pure love?

when you pray for each other

they are called pure love


سچچا عشق 

سچچا عشق وو نہیں جو ہوس پوری ہونے پر ختم ہو جائے 

سچچ عشق وو ہو جو ماشوک سامنے ہو اور ہاتھ لگانے کی ہمّت نا ہو 

सच्चा इश्क़ 

सच्चा इश्क़ वो नहीं जो हवस पूरी करने के बाद ख़त्म हो जाए 

सच्चा इश्क़ वो है जो माशूक सामने हो और हाथ लगाने की हिम्मत ना हो,

true love

True love is not that which ends after satisfying lust.

True love is when the beloved is right in front of you and you don't have the courage to touch it.


نفرت لفظوں مے نہیں لہزوں مے ہوتی ہے 

اس لئے لفظوں کے پیچھے مت بھاگیں 

नफरत शब्दों में नहीं लहजे में होती है

इसलिए शब्दों के पीछे मत भागो

Hate is not in words but in tone

So don't run after words


آپ جو دیکھتے ہیں اس پر کبھی یقین نہ کرو 

کیونکے دیکھنے مے تو نمک بھی چینی کی طرح لگتا ہے،

आप जो देखते हैं कभी उस पर यकीन ना करो 

क्योंकि देखने में तो नमक भी चीनी की तरह लगता है 

never believe what you see

Because salt also looks like sugar




fir se bachcha hona chahta hun

 



Writer Rizwan Ahmed 


बड़ा हूँ मगर फिर से बच्चा होना चाहता हूँ 

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


कभी इसके लिए जिया कभी उसके लिए जिया 

याद नहीं मुझे मैं कब अपने लिए जिया 

बुरा ना मानों मैं थोड़ा सा अपने लिए जीना चाहता हूँ 

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


माना के दूसरों के लिए जीने वालों को जन्नत मिलेगी 

यहाँ ना खिल सकी जो अरमानों की कली वो क़यामत में खिलेगी 

बताओ किया है बुरा जो थोड़ी सी जन्नत दुनिया में चाहता हूँ 

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


था शरारती ज्यादा प्यार माँ बाप का बचपन में पा ना सका 

थोड़ी ग़ुरबत भी थी इसलिए ज्यादा मुस्कुरा ना सका 

मुझे रुलाने वालों मैं भी अब खूब हंसना चाहता हूँ
 
मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


मैं जानता हूँ मैं बात बात पे रो देता हूँ 

इसी रोने की वजह से अपनी कदर खो देता हूँ 

लेकिन मैं कब किसी और को रुलाना चाहता हूँ 

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


हूँ दिल का सच्चा इसी लिए चुटकिओं में दिल भर आता है 

ज़ुल्म सह लेता है ये दिल ज़ुल्म मगर नहीं कर पाता है 

अब अपने आपको ज़ुल्मों से बचाना चाहता हूँ 

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


झूठे ही सही मगर वो सच्चों से अच्छे दिन थे 

थोड़े ही थे मगर ज्यादा से नहीं ज़रा कम थे

उन्ही झूठे दिनों में फिर से लौट जाना चाहता हूँ 
 
मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


सुनते ही मेरी गाडी के होरन को वो सब दौड़े आते थे 

मतलब ही के लिए सही मुझे देख कर सब मुस्कराते थे 

उसी मतलबी दुनिया में फिर जाना चाहता हूँ

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ


बड़ा हूँ मगर फिर से बच्चा होना चाहता हूँ 

मैं किसी के सीने से लग के रोना चाहता हूँ
#सैफ 

Babri masjid

Rizwan Ahmed 


कहते हैं अयोध्या में राम जन्मे, वहीं खेले-कूदे, बड़े हुए, बनवास भेजे गये, लौटकर आये तो वहाँ राज भी किया। उनकी ज़िंदगी के हर पल को याद करने के लिए एक मंदिर बनाया गया। जहाँ खेले, वहाँ गुलेला मंदिर है। जहाँ पढ़ाई की, वहाँ वशिष्ठ मंदिर हैं। जहाँ बैठकर राज किया, वहाँ मंदिर है। जहाँ खाना खाया, वहाँ सीता रसोई है। जहाँ भरत रहे, वहाँ मंदिर है। हनुमान मंदिर है, कोप भवन है। सुमित्रा मंदिर है, दशरथ भवन है। ऐसे बीसियों मंदिर हैं, और इन सबकी उम्र 400-500 साल है। यानी ये मंदिर तब बने, जब हिंदुस्तान पर मुगल या मुसलमानों का राज रहा।



अजीब है न! कैसे बनने दिये होंगे मुसलमानों ने ये मंदिर! उन्हें तो मंदिर तोड़ने के लिए याद किया जाता है। उनके रहते एक पूरा शहर मंदिरों में तब्दील होता रहा और उन्होंने कुछ नहीं किया! कैसे अताताई थे वे जो मंदिरों के लिए जमीन दे रहे थे! शायद वे लोग झूठे होंगे जो बताते हैं कि जहाँ गुलेला मंदिर बनना था, उसके लिए जमीन मुसलमान शासकों ने ही दी। दिगंबर अखाड़े में रखा वह दस्तावेज़ भी गलत ही होगा जिसमें लिखा है कि मुसलमान राजाओं ने मंदिरों के निर्माण के लिए 500 बीघा जमीन दी। निर्मोही अखाड़े के लिए नवाब सिराजुदौला के जमीन देने की बात भी सच नहीं ही होगी। सच तो बस बाबर है और उसकी बनवाई बाबरी मस्जिद! 


अब तो तुलसी भी गलत लगने लगे हैं जो 1528 के आसपास ही जन्मे थे। लोग कहते हैं कि 1528 में ही बाबर ने राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई। तुलसी ने तो देखा या सुना होगा उस बात को। राम के जन्म स्थल को बाबर तोड़ रहा था और तुलसी लिख रहे थे -- "माँग के खाइबो मसीत में सोइबो।" और फिर उन्होंने राम चरित मानस लिख डाली। राम मंदिर के टूटने का और बाबरी मस्जिद बनने का क्या तुलसी को जरा भी अफसोस नहीं रहा होगा? कहीं लिखा क्यों नहीं?


अयोध्या में सच और झूठ अपने मायने खो चुके हैं। मुसलमान पाँच पीढ़ी से वहाँ फूलों की खेती कर रहे हैं। उनके फूल सब मंदिरों पर, उनमें बसे देवताओं पर और राम पर चढ़ते रहे। मुसलमान वहाँ खड़ाऊँ बनाने के पेशे में जाने कब से हैं। संन्यासी, ऋषि-मुनि, राम भक्त, मुसलमानों की बनाई खड़ाऊँ पहनते रहे। सुंदर भवन मंदिर का सारा प्रबंध चार दशकों तक एक मुसलमान के हाथों में रहा। 1949 में इसकी कमान संभालने वाले मुन्नू मियाँ 23 दिसंबर 1992 तक इसके मैनेजर रहे। जब कभी लोग कम होते और आरती के वक्त मुन्नू मियाँ खुद खड़ताल बजाने खड़े हो जाते, तब क्या वह सोचते होंगे कि अयोध्या का सच क्या है और झूठ क्या?


अग्रवालों के बनवाये एक मंदिर की हर ईंट पर 786 लिखा है। उसके लिए सारी ईंटें राजा हुसैन अली खाँ ने दीं। किसे सच मानें? क्या मंदिर बनवाने वाले वे अग्रवाल सनकी थे? क्या वह हुसैन अली खाँ दीवाने थे जो मंदिर के लिए ईंटें दे रहे थे? इस मंदिर में दुआ के लिए उठने वाले हाथ हिंदू या मुसलमान किसके हों, पहचाना ही नहीं जाता, सब आते हैं। एक नंबर 786 ने इस मंदिर को सबका बना दिया। क्या बस 6 दिसंबर 1992 ही सच है!


6 दिसंबर 1992 के बाद सरकार ने अयोध्या के ज्यादातर मंदिरों को अधिग्रहण में ले लिया। वहाँ ताले पड़ गये। आरती बंद हो गई। लोगों का आना-जाना बंद हो गया। बंद दरवाजों के पीछे बैठे देवी-देवता क्या कोसते होंगे कभी उन्हें जो एक गुंबद पर चढ़कर राम को छू लेने की कोशिश कर रहे थे? सूने पड़े हनुमान मंदिर या सीता रसोई में उस खून की गंध नहीं आती होगी जो राम के नाम पर अयोध्या और भारत में बहाया गया?


अयोध्या एक शहर के मसले में बदल जाने की कहानी है। 


अयोध्या एक तहज़ीब के मर जाने की कहानी है।


(नोट -- उपरोक्त आलेख सरोज मिश्र जी का है। वह मेरी मित्रसूची में नहीं हैं। होते तो उन्हें टैग करता। इस आलेख को कई मित्रों ने साझा किया है। इसे पढ़कर बार-बार आँखें नम हुईं, हृदय भर आया, और इसी कारण मैं भी इसे साझा करने से स्वयं को रोक नहीं पा रहा हूँ।)

baten sone ke jaisi

  



Rizwan Ahmed (Saif)


کسی کے معافی مانگ لینے سے یہ ثابت نہیں ہوتا کے 

وو غلط ہے 

بلکی اسے یہ ثابت ہوتا ہے کے اسکے اندر رشتہ نبھانے 

کی صلاحیت ہم سے جیادہ ہے،


किसी के माफ़ी मांग लेने से ये साबित नहीं होता के 

वो ग़लत है 

बल्कि उससे ये साबित होता है के उसके अंदर रिश्ता निभाने 

की सलाहियत हम से ज्यादा है, 


Apologizing to someone doesn't prove that

that's wrong

Rather, it proves that there is a need to maintain a relationship within him

has more talent than us,



नोट:मैं चाहता हूँ आगे भी इसी तरह लिखता जाऊं इसके लिए मुझे आप सब की सपोर्ट चाहिए तीन सालों से इस वेबसाइट को चला रहा हूँ बहुत पैसा खर्च कर चूका हूँ आप लोग मुझे सपोर्ट करें 

UPI ID है 9910222746@axisbank या 9910222746 इस नंबर पर मुझे सपोर्ट करें,

या QR कोड को स्कैन करके मुझे सपोर्ट करें,


حالات اور وقت کی تبدیلیوں کے ساتھ بدلنے والے 
تللکوں سے بہتر ہے کے انسان تنہا رہے، 

हालात और वक़्त के बदलाव के साथ बदलने 
वाले ताल्लुकों से बेहतर है के इंसान तनहा रहे,

 change with the change of circumstances and times

It is better for a person to be alone than to have relationships


حضرت علی 

یہ دنیا بھی کتنی عجیب ہے 

ایماندار کو بیوکوف بے امان کو عقلمند 

اور بے حیاء کو خوبصورت کہتی ہے 


हज़रत अली 

ये दुनिया भी कितनी अजीब है 

ईमानदार को बेवकूफ बेईमान को अक़्लमंद 

और बे हया को खूबसूरत कहती है 

hazrat ali

how strange is this world

stupid to honest dishonest to intelligent

And shameless calls her beautiful


وقت نے ایک ہی بات سکھائی ہے 

ہر تعلّق ناتا رشتہ تبھی تک زندہ ہے 

جب تک آپ دوسروں کے معیار توققو پر 

پورا اترتے رہیں،


वक़्त ने एक ही बात सिखाई है 

हर ताल्लुक़ नाता रिश्ता तभी तक ज़िंदा है 

जब तक आप दूसरों के मियार तवक़्क़ो पर 

पूता उतरते रहें, 


time has taught me only one thing

every relationship lasts

as long as you serve the needs of others


یاد رکھیں جو لوگ آپکو غلط سمجھتے ہیں 

وو مرتے دم تک آپکو غلط ہی سمجھیںگے 

کیونکے علاج نظروں کا ہوتا ہے نظریے کا نہیں 


याद रखें जो लोग आपको ग़लत समझते हैं 

वो मरते दम तक आपको ग़लत ही समझेंगे क्योंकि 

इलाज नज़र को होता है नज़रिये का नहीं,


remember those who misunderstand you

They will misunderstand you till the day they die because

The treatment is done by sight, not by thinking.

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